Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति ( Chanakya Niti ) chapter-10

धनहीनो न हीनश्च धनिकः स सुनिश्चयः ।विद्यारत्नेन हीनो यः स हीनः सर्ववस्तुषु ॥ (10. 1) जिसके पास धन नहीं है वो गरीब नहीं है, वह तो असल में रहीस है, यदि उसके पास विद्या है. लेकिन जिसके पास विद्या नहीं है वह तो सब प्रकार से निर्धन है. One destitute of wealth is not destitute, […]

Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-9

मुक्तिमिच्छसि चेत्तात विषयान्विषवत्त्यज ।क्षमार्जवदयाशौचं सत्यं पीयूषवत्पिब ॥ (9. 1) यदि तुम जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना चाहते हो तो जिन विषयो के पीछे तुम इन्द्रियों की संतुष्टि के लिए भागते फिरते हो उन्हें ऐसे त्याग दो जैसे तुम विष को त्याग देते हो. इन सब को छोड़कर हे तात तितिक्षा, ईमानदारी का आचरण, […]

Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-8

अधमा धनमिच्छन्ति धनमानौ च मध्यमाः ।उत्तमा मानमिच्छन्ति मानो हि महतां धनम् ॥ (8. 1) नीचें वर्गे के लोग दौलत चाहते है, मध्यम वर्गे के दौलत और इज्जत, लेकिन उच्च वर्गे के लोग सम्मान चाहते है क्यों की सम्मान ही उच्च लोगो की असली दौलत है. Low class men desire wealth; middle class men both wealth […]

Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-7

अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च ।वञ्चनं चापमानं च मतिमान्न प्रकाशयेत् ॥ (7. 1) एक बुद्धिमान व्यक्ति को निम्नलिखित बातें किसी को नहीं बतानी चाहिए …  उसकी दौलत खो चुकी है. उसे क्रोध आ गया है. उसकी पत्नी ने जो गलत व्यवहार किया. लो ने उसे जो गालिया दी. वह किस प्रकार बेइज्जत हुआ है. A […]

Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) Chapter-6

श्रुत्वा धर्मं विजानाति श्रुत्वा त्यजति दुर्मतिम् ।श्रुत्वा ज्ञानमवाप्नोति श्रुत्वा मोक्षमवाप्नुयात् ॥ (6. 1) श्रवण करने से धर्मं का ज्ञान होता है, द्वेष दूर होता है, ज्ञान की प्राप्ति होती है और माया की आसक्ति से मुक्ति होती है. By means of hearing one understands dharma, malignity vanishes,knowledge is acquired, and liberation from material bondage is […]

Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-5

Chanakya Niti (चाणक्य नीति) गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः ।। (5. 1) ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए . दुसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए . पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आये उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए. […]

Categories
Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-4

आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥ (4. 1) निम्नलिखित बातें माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाती है…. १. व्यक्ति कितने साल जियेगा २. वह किस प्रकार का काम करेगा ३. उसके पास कितनी संपत्ति होगी ४. उसकी मृत्यु कब होगी . These five: the life-span, […]