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Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता-चौधा अध्याय-ज्ञानकर्मसन्यास योग(Bhagwad Gita chapter-4)

(The Yoga of Knowledge as well as the discipline of Action and Knowledge) (कर्म-अकर्म और विकर्म का निरुपण) (The glory of God with attributes;Karmayoga, or selfless action, described.) श्री भगवानुवाचइमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ ।विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥ (१)भावार्थ : श्री भगवान ने कहा – मैंने इस अविनाशी योग-विधा का उपदेश सृष्टि के आरम्भ में विवस्वान (सूर्य […]