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Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) Chapter-6

श्रुत्वा धर्मं विजानाति श्रुत्वा त्यजति दुर्मतिम् ।श्रुत्वा ज्ञानमवाप्नोति श्रुत्वा मोक्षमवाप्नुयात् ॥ (6. 1) श्रवण करने से धर्मं का ज्ञान होता है, द्वेष दूर होता है, ज्ञान की प्राप्ति होती है और माया की आसक्ति से मुक्ति होती है. By means of hearing one understands dharma, malignity vanishes,knowledge is acquired, and liberation from material bondage is […]