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Prathna

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो हिंदी प्रार्थना Lyrics

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो ।तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो ।तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही हो ॥ तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे ।कोई ना अपना सिवा तुम्हारे ॥तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे ।कोई ना अपना सिवा तुम्हारे ॥ तुम ही हो नईया, तुम […]

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Aarti

श्री सत्यनारायणजी की आरती Shree Satyanarayanji Ki Aarti Lyrics in Hindi

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक-हरणा ॥ जय लक्ष्मी रमणा ॥ रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे ।नारद करत नीराजन, घंटा वन बाजे ॥ जय लक्ष्मी रमणा ॥ प्रकट भए कलि कारण, द्विज को दरस दियो ।बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥ जय लक्ष्मी रमणा ॥ दुर्बल भील कठारो, जिन […]

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Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-5

Chanakya Niti (चाणक्य नीति) गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः ।पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः ।। (5. 1) ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए . दुसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए . पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आये उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए. […]

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Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-4

आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥ (4. 1) निम्नलिखित बातें माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाती है…. १. व्यक्ति कितने साल जियेगा २. वह किस प्रकार का काम करेगा ३. उसके पास कितनी संपत्ति होगी ४. उसकी मृत्यु कब होगी . These five: the life-span, […]

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Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) chapter-1

प्रणम्य शिरसा विष्णुं त्रैलोक्याधिपतिं प्रभुम् ।नानाशास्त्रोद्धृतं वक्ष्ये राजनीतिसमुच्चयम् ॥ (1. 1) तीनो लोको के स्वामी सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु को नमन करते हुए मै एक राज्य के लिए नीति शास्त्र के सिद्धांतों को कहता हूँ. मै यह सूत्र अनेक शास्त्रों का आधार ले कर कह रहा हूँ। Humbly bowing down before the almighty Lord Sri Vishnu, […]

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Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता-दूसरा अध्याय-संख्या योग(Bhagwad Gita chapter-2)

“Sankhyayoga”(the Yoga of Knowledge) (अर्जुन के शोक का कारण)  संजय उवाचतं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ ।विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ (१) भावार्थ : संजय ने कहा – इस प्रकार करुणा से अभिभूत, आँसुओं से भरे हुए व्याकुल नेत्रों वाले, शोकग्रस्त अर्जुन को देखकर मधुसूदन श्रीकृष्ण ने यह शब्द कहे। (१) Sanjaya said : Sri Krishna then addressed thefollowing […]

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Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता-प्रथम अध्याय-अर्जुनविषादयोग (Bhagwad Gita chapter-1)

(The Yoga of Dejection of Arjuna) (योद्धाओं की गणना और सामर्थ्य) (Description of the principal warriorson both sides with their fighting qualities.) धृतराष्ट्र उवाचधर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ (१)भावार्थ : धृतराष्ट्र ने कहा – हे संजय! धर्म-भूमि और कर्म-भूमि में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे पुत्रों और पाण्डु के […]