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Chanakya Niti

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) Chapter-2

अनृतं साहसं माया मूर्खत्वमतिलोभिता ।अशौचत्वं निर्दयत्वं स्त्रीणां दोषाः स्वभावजाः (2. 1) झूठ बोलना, कठोरता, छल करना, बेवकूफी करना, लालच, अपवित्रता और निर्दयता ये औरतो के कुछ नैसर्गिक दुर्गुण है। Untruthfulness, rashness, guile, stupidity, avarice, uncleanliness and cruelty are a women’s seven natural flaws. भोज्यं भोजनशक्तिश्च रतिशक्तिर्वराङ्गना ।विभवो दानशक्तिश्च नाल्पस्य तपसः फलम् ॥ (2. 2) भोजन […]

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Shubhasitani

सुभाषितानि (Shubhasitani) Part-3

कुसुमस्तबकस्येव द्वयीवृत्तिर्मनस्विनः। मूर्ध्नि वा सर्वलोकस्य विशीर्येत वनेऽथवा ॥ फूलों की तरह मनस्वियों की दो ही गतियाँ होती हैं; वे या तो समस्त विश्व के सिर पर शोभितहोते हैं या वन में अकेले मुरझा जाते हैं ॥ Like a flower, great men have only two ways, either they shine on top of everyone or decay unnoticed in the forest. मन्दोऽप्यमन्दतामेति संसर्गेण विपश्चितः। पङ्कच्छिदः फलस्येव निकषेणाविलं […]

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Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता-चौधा अध्याय-ज्ञानकर्मसन्यास योग(Bhagwad Gita chapter-4)

(The Yoga of Knowledge as well as the discipline of Action and Knowledge) (कर्म-अकर्म और विकर्म का निरुपण) (The glory of God with attributes;Karmayoga, or selfless action, described.) श्री भगवानुवाचइमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ ।विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥ (१)भावार्थ : श्री भगवान ने कहा – मैंने इस अविनाशी योग-विधा का उपदेश सृष्टि के आरम्भ में विवस्वान (सूर्य […]

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Bhagwad Gita

श्रीमद्भगवद्गीता-प्रथम अध्याय-अर्जुनविषादयोग (Bhagwad Gita chapter-1)

(The Yoga of Dejection of Arjuna) (योद्धाओं की गणना और सामर्थ्य) (Description of the principal warriorson both sides with their fighting qualities.) धृतराष्ट्र उवाचधर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ (१)भावार्थ : धृतराष्ट्र ने कहा – हे संजय! धर्म-भूमि और कर्म-भूमि में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे पुत्रों और पाण्डु के […]